बीजा कसा झरना यात्रा अनुभव | Bijakasa Waterfall Bastar Travel Blog (Hindi)
तारीख: 19 दिसंबर 2025
आज अचानक लैपटॉप की पुरानी फ़ाइलें देखते समय बीजा कसा झरने की एक तस्वीर मिल गई। कोई खास वजह नहीं थी, बस यूँ ही पुरानी तस्वीरें देख रहा था। लेकिन जैसे ही उस तस्वीर पर नज़र गई, पूरा दिन और पूरा सफ़र याद आ गया।
यह यात्रा सितंबर महीने की थी। बारिश का मौसम लगभग खत्म होने वाला था, लेकिन चारों तरफ हरियाली बनी हुई थी। हवा में मिट्टी की खुशबू थी और आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे।
बीजा कसा झरने की यात्रा कैसे शुरू हुई
वह दिन शायद रविवार था। आमतौर पर रविवार को ही कहीं निकलने का मन करता है। न कोई लंबा प्लान था और न ही ज्यादा तैयारी। बस अचानक तय हुआ और हम बाइक से निकल पड़े।
हमें रास्ते की पूरी जानकारी नहीं थी। बस इतना पता था कि बस्तर की ओर जाना है और आगे गांवों में पूछते-पूछते रास्ता मिल जाएगा। जैसे-जैसे शहर से बाहर निकले, ट्रैफिक कम होता गया और माहौल शांत होता चला गया।
रास्ते का अनुभव: पक्की सड़क से कच्चे रास्ते तक
कुछ दूरी तय करने के बाद पक्की सड़क खत्म हो गई और हमें कच्चे रास्ते पर उतरना पड़ा। कई जगह लेफ्ट-राइट को लेकर कन्फ्यूजन हुआ, इसलिए स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना पड़ा।
आखिरकार हम उस गांव में पहुंचे, जहां से बीजा कसा झरने तक पैदल रास्ता शुरू होता है।
खेतों के बीच से पैदल सफर
झरने तक जाने का रास्ता धान के खेतों के बीच से होकर जाता है। उस समय खेतों में धान लगी हुई थी और चारों तरफ हरियाली फैली हुई थी।
खेतों के बीच बना रास्ता पानी से भरा हुआ था। पानी घुटनों तक था, इसलिए जूते पहनकर चलना मुश्किल था। हमने जूते उतारे और हाथ में पकड़कर पानी से होकर आगे बढ़ने लगे।
यह सफर थोड़ा मुश्किल जरूर था, लेकिन बहुत अच्छा लग रहा था।
बीजा कसा झरना कैसा है
जैसे-जैसे आगे बढ़े, पानी गिरने की आवाज़ तेज होती गई। कुछ ही देर में बीजा कसा झरना सामने दिखाई देने लगा।
यह झरना बहुत ऊंचा नहीं है, लेकिन इसका वातावरण बहुत शांत और सुकून देने वाला है। पानी साफ था और आसपास घनी हरियाली थी। झरने के पास खड़े होकर काफी अच्छा महसूस हो रहा था।
हमने पहले ऊपर के हिस्से को देखा, जहां कुछ लोग नहा रहे थे। उसके बाद नीचे आकर झरने को सामने से देखा। नीचे से झरना ज्यादा सुंदर लग रहा था।
झरने के पास समय बिताना
हम वहां काफी देर तक बैठे रहे। ज्यादा बातें नहीं हुईं। बस झरने का पानी देखते रहे और उस जगह का आनंद लिया।
फिर कुछ तस्वीरें लीं ताकि इस पल को याद के रूप में सहेज सकें।
वापसी और गांव की टापरी
वापसी के समय वही रास्ता दोबारा तय किया — खेत, पानी और कच्चा रास्ता। इस दौरान भूख लगने लगी थी।
खेत के पास एक छोटी सी टापरी , जो मिट्टी और लकड़ी से बनी हुई थी। वहीं हमने “बड़ा” खाया। साधारण था, लेकिन उस समय बहुत अच्छा लगा।
बीजा कसा झरना क्यों खास है
बीजा कसा झरना सिर्फ देखने की जगह नहीं है। यह जगह शांति और सुकून देती है। यहां आकर शहर की भागदौड़ से कुछ समय के लिए दूरी मिल जाती है।
आज जब उस तस्वीर को देखता हूं, तो महसूस होता है कि यह यात्रा सिर्फ एक जगह की नहीं थी, बल्कि एक अच्छा अनुभव थी।
